भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बसते हैं भोलेनाथ

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 

भगवान शिव को भोलेनाथ, महादेव आदि नामों से पूजा जाता है। कहते हैं कि वे थोड़ी सी भक्ति करने पर अपने भक्तों की मनोकामना पूरी कर देते हैं। वहीं भारत में उनके कई प्राचीन मंदिर स्थापित है। साथ ही इनकी बेहद मान्यता है। मगर क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव के मंदिर भारत से बाहर यानि विदेशों में भी स्थापित है। जी हां, इंडिया से लेकर इंडोनेशिया, साउथ अफ्रीका आदि कई देशों में शिव जी के प्राचीन मंदिर हैै। मगर आज हम आपको उनमें से 4 शिव मंदिरों के बारे में बताते हैं...

कटासराज मंदिर (पाकिस्तान) 

कटासराज मंदिर भारत के पड़ौसी देश पाकिस्तान से करीब 40 किलीमीटर की दूरी पर स्थापित है। यह एक पहाड़ी पर स्थित है। महाभारत काल से स्थापित इस प्राचीन मंदिर से पांडवों की बहुत सी कथाएं संबंध रखती है। कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित कटाक्ष कुंड शिव जी के आंसूओं से बना था। साथ ही इस कुंड से जुड़ी एक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि देवी सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव के आंसूओं से दो कुंड बने थे। इनमें एक कुंड पाकिस्तान में हैं तो दूसरा भारत के राजस्थान राज्य के पुष्कर में स्थापित है। 

प्रम्बानन मंदिर (इंडोनेशिया) 

इंडोनेशिया के जावा द्वीप के मध्य में प्रम्बानन मंदिर स्थापित है। कहा जाता है कि भगवान शिव का यह मंदिर 10 वीं शताब्दी में बना था। यह शहर से करीब 17 किलीमीटर की दूर पर है।इस मंदिर में भगवान शिव देवी दुर्गा के राज विराजमान है। ऐसे में अगर आपका कभी इंडोनेशिया घूमने का प्लान हुआ तो प्रम्बानन मंदिर में महादेव के दर्शन करने जरूर जाए।

मुन्नेस्वरम मंदिर (श्रीलंका) 

भोलेनाथ का मुन्नेस्वरम मंदिर भारत नहीं बल्कि श्रीलंका में स्थापित है। इस प्राचीन मंदिर का संबंध रामायण काल से माना जाता है। कहते हैं कि रावण का वध करने के बाद श्रीराम ने इसी स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी। इस भव्य व प्राचीन मंदिर में कुल पांच मंदिर स्थापित है। मगर इनमें सबसे बड़ा मंदिर भगवान शिव का है। 

मध्य कैलाश मंदिर (साउथ अफ्रीका) 

साउथ अफ्रीका में भगवान शिव का एक बेहद ही बड़ा व मशहूर मंदिर है। करीब 6 हजार साल पूराने इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस प्राचीन मंदिर में शिव जी के साथ अन्य देवी-देवताओं की भी मूर्तियां स्थापित है।