हम आज आखिरी रोयेंगे!

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


जिस ओर उठाये मुँह चल दूँगा,

कदम फिर लौट के न आयेंगे।

फासलें मिट जायेंगे साँसों के,

हम खुद से ही मिल न पायेंगे।।


प्रण आखिरी जाने से पहले,

जो शेष बचा है वो भी खोयेंगे।

पल भर की मस्ती की खातिर,

हम आज आखिरी रायेंगे।।


बचा सके न आँसू बहने से,

प्रवाह में बहते-बहते जायेंगे।

अच्छा है पीड़ा का आलम,

चोट नई-नईं खाते जायेंगे।।


अटक जाती वाणी कंठ में,

आँख-नाक बहते जायेंगे।

पल भर की मस्ती खातिर,

हम आज आखिरी रायेंगे।।


परिचय - ज्ञानीचोर

शोधार्थी व कवि साहित्यकार

मु.पो. रघुनाथगढ़, सीकर राज.

मो. 9001321438